Sunday, April 4, 2010

तुम जैसे सब से पेश आओगे वैसे ही सब तुमसे पेश आएँगे

बचपन में एक कहानी पढ़ी थी कि
एक कुत्ता कहीं से भटकते हुए एक शीशमहल में जा घुसा और वहां ढेर सारे शीशों में खुद की ढेर सारी आकृतियाँ देख कर समझा की अब तो खैर नहीं इतने सारे कुत्तों ने घेर लिया है अब तो एक ही चारा है do or die और बस फिर क्या था कुत्ता गुर्राया सारे कुत्ते गुर्राए ,कुत्ता भौंका सारे कुत्ते भौंके और फिर कुत्त...े ने पहले शीशे पर हमला किया , शीशा टूट गया और एक कुत्ता गायब हो गया लेकिन ये कुत्ता इस प्रक्रिया में थोडा घायल हो गया फिर दूसरा शीशा फिर तीसरा फिर चौथा शीशे टूटते रहे और कुत्ता घायल होते होते अंत में स्वर्ग सिधार गया .

वहीँ कुछ समय बाद एक दूसरा कुत्ता आ गया अब इसने भी देखा की सैकड़ों कुत्तों ने घेर लिया है क्या किया जाए जान मुश्किल में फंसी देख इस दुसरे कुत्ते ने दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए अपनी पूंछ थोडा हिलाई बाकि सब तो आकृति मात्र ही थे सो उनकी भी पूछ भी हिलने लगी इस पर कुत्ता मस्त हो गया और दोड़ कर एक शीशे में दिख रहे कुत्ते से खेलने लगा फिर दुसरे से फिर तीसरे से और अंत में खेल कूद कर वापस चला गया.
moral of the story is की तुम जैसे सब से पेश आओगे वैसे ही सब तुमसे पेश आएँगे
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6 comments:

  1. Aapne sahi likha hai..hame sajag rahna chahiye!

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  2. what a nice story........
    thank u very much..to tell such a story..

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  3. Moral of the story is really good!

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  4. ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है... इसी तरह तबियत से लिखते रहिये, हिंदी में आपका लेखन सराहनीय है, धन्यवाद

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  5. इस नए चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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